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बाराबंकी: शहर के अंदर बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था

University Times/Barabanki

रिपोर्ट- जे.एल. कनौजिया “पिन्टू”

यातायात जाम से परेशान शहर के लोगों को राहत मिलती नहीं नजर आ रही है। इसके लिए तैयार की गई योजनाएं सिर्फ फाइलों में कैद होकर रह गई हैं। इसके चलते शहर के चौराहों पर एक साल के दौरान न जेब्रा लाइन बन पाई और न ही ट्रैफिक सिग्नल लगाने पर फैसला हुआ था। चौराहे पर तैनात होने वाले पुलिस व होमगार्ड्स के जवान यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। इसके चलते शहर के हर चौराहे-तिराहे पर आम जनमानस प्रतिदिन जाम से जूझता है।

करीब तीन लाख की जनसख्या वाले बाराबंकी शहर में बहुत से लोग सुबह बाहर से आते और शाम को वापस जाते हैं। सुबह-शाम ही शहर में जाम की समस्या गंभीर होती है। सुबह नौ बजने तक प्रमुख चौराहों से गुजरने में वाहन चालकों की परेशानी हो जाती है। डीएम आवास से लेकर रामनगर तिराहे तक हाईवे पर सर्वाधिक खराब स्थिति रजिस्ट्री कार्यालय के सामने रहती है। सड़क पर वाहनों के खड़े होने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित रहता है। इसी के चलते देवा तिराहे तक जाम लगता है। रोडवेज बस अड्डा, जनेस्मा डिग्री कालेज व कचहरी आने वाले लोगों को घंटों परेशान होना पड़ता है। सड़क पर खड़े होने वाले आटो और ई-रिक्शा जाम को और बढ़ाते हैं। यही हाल लखपेड़ाबाग चौराहा, सतरिख नाका, धनोखर चौराहा, घंटाघर और पीरबटावन इलाके का है।
यातायात व्यवस्था नियंत्रित करने के लिए एक टीएसआई, एक दरोगा, 10 सिपाही व 40 होमगार्ड की तैनाती बेअसर साबित हो रही है। शहर में लगातार गहराती जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए करीब एक वर्ष पूर्व अधिकारियों ने योजना तैयार की थी। उसके तहत जाम की समस्या से निपटने के लिए जेब्रा लाइन बनाई जानी थी। इसके साथ ही सभी प्रमुख चौराहों-तिराहों पर ट्रैफिक सिंग्नल लगना था। इसके साथ अन्य इंतजामों की बात कही गई लेकिन योजनाएं फाइलों में ही कैद होकर रह गईं। शहर के लोग रोज जाम से परेशान हो रहे हैं।
ई-चालान का भी कोई असर नही
चौराहों पर बेतरतीब खड़े होकर जाम लगाने वाले वाहनों का ई-चालान काटने की कार्रवाई एक माह से चल रही है। रोज कई लोगों के ई-चालान हो रहे हैं। इसके बावजूद चौराहों व व्यस्त स्थानों की हालत नहीं सुधरी।

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